Goal & Action

शोध सम्बन्धी एवं लोकाभिमुख उद्देश्य एवं कार्य


  • नाथ-पंथ के दर्शन एवं उसके अवदानों पर शोध करना।
  • महायोगी श्रीगोरक्षनाथ प्रवर्तित योग के दार्शनिक एवं आयुर्विज्ञान सम्बन्धी पक्षों का विश्लेषण करना।
  • नाथ-पंथ की दार्शनिक पृष्ठभूमि एवं व्यावहारिकता का आकलन करना।
  • नाथ परम्परा के सामाजिक अवदान का आकलन एवं अनुप्रयोग करना।
  • राष्ट्रीय पुनर्जागरण में नाथ-पंथ की भूमिका का अध्ययन करना।
  • राष्ट्रीय आंदोलन में नाथ-पंथ की भूमिका का अध्ययन करना।
  • वर्तमान युग में सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राजनीतिक नवजागरण में नाथ-पंथ की भूमिका का अध्ययन करना।
  • नाथ-पंथ के विश्वकोष का निर्माण करना।
  • नाथ-पंथ से सम्बन्धित साहित्य का प्रामाणिक विवरण तैयार करना।
  • नाथ-पंथ से सम्बन्धित बाह्य शोध-अध्येताओं के प्रबन्धों का प्रकाशन करना।
  • षड्मासिक पत्रिका का प्रकाशन करना।
  • भक्ति आन्दोलन एवं नाथ-पंथ के अन्तःसम्बन्धों का समीक्षात्मक अध्ययन करना।
  • भारत सहित विश्व भर में स्थापित नाथ-पीठों का अध्ययन एवं उनके अवदान का आकलन करना।
  • भक्ति आंदोलन में नाथ-पंथ के योगदान का आकलन करना।
  • नाथ-पंथ के योगियों की परम्परा के विकास को रेखांकित करना।
  • नाथ-पंथ के अन्य दार्शनिक प्रस्थानों के साथ अन्तः सम्बन्धों का अध्ययन करना।
  • वर्तमान वैश्विक समस्याओं के समाधान में नाथ-पंथ की भूमिका का अन्वेषण करना।
  • मासिक, त्रैमासिक, षड्मासिक तथा वार्षिक संगोष्ठियों एवं कार्यशालाओं का आयोजन करना एवं शोध-कार्यो एवं निष्कर्षो का प्रकाशन करना।
  • नाथ-पंथ पर आधारित Add-on डिप्लोमा पाठ्यक्रम आदि का संचालन करना।
  • पी-एच.डी. उपाधि हेतु शोधार्थियों का प्रवेश प्रारम्भ करना।
  • नाथ-पंथ से सम्बन्धित शैक्षिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतिक कार्यानुरूप महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ द्वारा वार्षिक-राज्यस्तरीय तथा राष्ट्रीय पुरस्कारों की स्थापना करना।
  • नाथ-पंथ से जुड़ी सामग्रियों के लिए संग्रहालय की स्थापना करना।
  • महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ के उद्देश्यों की सम्पूर्ति के लिए सरकारी तथा स्वैच्छिक बाह्य संगठनों से आर्थिक सहयोग प्राप्त करना।
  • भारत एवं विश्व में सहयोगार्थ महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोध-पीठों की स्थापना तथा संचालन करना।

पंचवर्षीय कार्य-योजना

प्रथमवर्ष:अवस्थापना एवं नियुक्ति सम्बन्धी कार्य।
द्वितीयवर्ष:नाथ-पंथ से सम्बन्धित विभिन्न सामग्रियों का संकलन।
तृतीयवर्ष:संकलित सामग्रियों का शोध-परक अध्ययन एवं तदनुसार प्रकाशन का शुरू किया जाना।
चतुर्थवर्ष:नाथ-पंथ के विश्वकोष पर कार्यारम्भ।
पंचमवर्ष:विगत-चतुर्वर्षीय शोध-कार्यो का प्रकाशन; नाथ-पंथ पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन; महायोगी गुरु श्री गोरक्षनाथ शोधपीठ के कृतशोध, सवंर्धित शैक्षिक आदि आयामों का मूल्यांकन एवं आगामी पंचवर्षीय कार्य-योजना तैयार करना।


अद्यतन-स्थिति

  • महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ को संचालित करने हेतु प्रस्तावित अध्यादेश, नियम व विनियमन को श्री राज्यपाल के अनुमोदनार्थ दिनांक 06 अक्टूबर, 2018 को प्रेषित किया गया।
  • उत्तर प्रदेश के संस्कृति मंत्रालय के निर्देश पर उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम (UPRNN) को महाराणा प्रताप शिक्षा परिसर में स्थल का निरीक्षण कर महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ स्थापित किये जाने हेतु चार मंजिला भवन हेतु नक्शा तैयार कर एवं तत्सम्बन्धी व्यय भार वहन हेतु रिपोर्ट संस्कृति मंत्रालय में पूरक बजट हेतु प्रस्तुत किया गया। उक्त भवन निर्माण संस्कृति मंत्रालय द्वारा किया जायेगा।
  • महामहिम श्री राज्यपाल की अध्यादेश, नियम व विनियमन पर संस्तुति प्राप्ति के पश्चात्महायोगीगुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ में शैक्षिक एवं शिक्षणेत्तर पदों के विज्ञापन करने की योजना है। महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ में शैक्षिक एवं शिक्षणेत्तर पदों पर चयन-प्रक्रिया को शीघ्र ही प्रारम्भ किया जाना है।